अब बेहड पर शुक्ला का शोसल मीडिया बार।
लिखा आप ने किच्छा को पांच वर्ष में अपराध, झूठ और भ्रष्टाचार के गर्त में डाला।
सौरभ के कारनामे पर लिखा बच्चे बड़ों को देखकर ही सीखते हैं।
शुक्ला की कलम से
माननीय विधायक जी,
मुझ नाचीज़ को टार्गेट करके, मुझ नाचीज़ को जवाब देकर, आपको क्या हासिल होता है?
मैंने ब्लॉक चुनाव में क्या किया और आपने ब्लॉक चुनाव में क्या किया वह तो आपके सम्मोहित सिपाही मन्नू पाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद ही बता दिया और विधायक जी बच्चे की गलती की तो मैं मानता हूं कि हाँ बच्चे से गलती हो गई पर बच्चे गलती भी घर के बड़ों को देखकर ही करते हैं निश्चित ही बच्चे ने अपने घर के बड़ो को ऐसी गलतियां गढ़ते देखा होगा तभी तो वो इसके लिये प्रेरित हुआ। प्रशासन, सरकार या शुक्ला तो उसे ये सिखाने समझाने नहीं गए थे।
रही बात मुझे आईना देखने की आपकी नसीहत की तो मैं रोज आईना देखता हूं और बड़े ही गर्व के साथ आईना देखता हूं….
क्योंकि मैंने अपने राजनितिक जीवन में कर्तव्य को सर्वोपरि रखा, मैंने अपने राजनितिक जीवन में किच्छा के विकास सपने देखे…
लेकिन आपके कार्यकाल के 5 साल तो कन्फयूज़न में निकल गए ऐसा लगा जैसे आपको जनता ने क्षेत्र के विकास के लिये नहीं बल्कि शुक्ला को टार्गेट करने के लिये जिताया है।
अब आरोप – प्रत्यारोप का झुंझुना बजाना, प्रशासन के दबाव का रोना-गाना और मुझ नाचीज़ की छवि ख़राब करने की अपनी छिछली आदतों को इस्तेमाल करने के अलावा आपके पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है।
विधायक जी आपने किच्छा की जनता से विकास के 5 साल छीन लिये, आपने किच्छा को 5 साल के लिये अपराध, झूठ और भ्रष्टाचार के गर्त में डाल दिया और खुद कभी बेटे के करियर में उलझ गए, कभी अपनी ही पार्टी में कलह कारक बन गए, कभी राजनितिक विरोधियों को झूठे मामलों में फ़साने के षड़यंत्रों में रह गए और कभी धरने पर बैठने बिठाने में रह गए।
अरे! कम से कम अपनी पार्टी के बड़े नेताओं को देखकर ही सीख लेते कि लोक तंत्र में जनता का समय खराब करने वालों का सिला क्या होता है


