ट्रेनिंग के अस्पताल से शुरू हुई प्रेम कहानी, अब दो जिलों की कमान: रेखा यादव–अजय गणपति बने उत्तराखंड की चर्चित आईपीएस जोड़ी
उत्तराखंड पुलिस के ताजा प्रशासनिक फेरबदल ने इस बार सिर्फ तबादलों की खबर नहीं दी, बल्कि एक ऐसी प्रेम कहानी को भी सुर्खियों में ला दिया जिसने वर्दी के साथ रिश्तों की मिसाल कायम की है। 2019 बैच की आईपीएस अधिकारी रेखा यादव को चंपावत जिले का पुलिस कप्तान बनाया गया है, जबकि उनके पति 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय गणपति कुंभार अब उधम सिंह नगर के नए एसएसपी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दिलचस्प यह है कि रेखा यादव ने चंपावत की कमान अपने ही पति से संभाली है।
रेखा यादव मूल रूप से राजस्थान के कोटपुतली, जयपुर की रहने वाली हैं और अपने क्षेत्र की पहली महिला आईपीएस अधिकारी होने का गौरव रखती हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर वर्दी तक का सफर तय करने वाली रेखा को सिविल सेवा के लिए उनके पिता ने प्रेरित किया, जो दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल रहे हैं। उत्तराखंड कैडर मिलने के बाद उन्होंने हरिद्वार में एसपी क्राइम, देहरादून में एएसपी, चमोली में एसपी और फिर पिथौरागढ़ में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सख्त और संवेदनशील छवि बनाई। पेपर लीक मामले में एसआईटी प्रभारी रहते हुए उनकी निर्णायक कार्रवाई चर्चा में रही, वहीं “नशा मुक्त देवभूमि मिशन 2025” के तहत ड्रग फ्री अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
लेकिन उनकी सबसे ज्यादा चर्चा उनकी और अजय गणपति कुंभार की प्रेम कहानी को लेकर हो रही है। दोनों की मुलाकात हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान हुई। उसी समय एक दुर्घटना में रेखा यादव के पैर में फ्रैक्चर हो गया और अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान अजय गणपति उनसे मिलने पहुंचे। यही मुलाकात धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई। दोस्ती ने कब प्यार का रूप ले लिया, दोनों को भी एहसास नहीं हुआ। बाद में दोनों ने पहले कोर्ट मैरिज की और फिर पूरे रीति-रिवाज से विवाह किया। शादी के बाद अजय गणपति ने अपना कैडर परिवर्तन कर उत्तराखंड में सेवाएं देनी शुरू कीं।
आज यह आईपीएस दंपति उत्तराखंड के दो अहम जिलों की कमान संभाल रहा है। एक ओर चंपावत में नई कप्तान के रूप में रेखा यादव की तैनाती महिला नेतृत्व का मजबूत संदेश दे रही है, तो दूसरी ओर उधम सिंह नगर में अजय गणपति कुंभार की नियुक्ति प्रशासनिक सख्ती और अनुभव का संकेत मानी जा रही है। वर्दी में प्रेम, जिम्मेदारी में संतुलन और सेवा में समर्पण की यह कहानी इन दिनों तैनाती से ज्यादा चर्चा में है।


